I Am Anonymous Me.People often tell me...What ?...I didn't get you ! Very Non Conclusive on almost every aspect of Life

दूर खड़ी है मधुशाला !



चलने ही चलने में कितना जीवन, हाय, बिता डाला; 'दूर अभी है', पर, कहता है हर पथ बतलानेवाला|
हिम्मत है न बढूँ आगे को साहस है न फिरुँ पीछे; किंकर्तव्यविमूढ़ मुझे कर दूर खड़ी है मधुशाला||

दो और दो का जोड़

दो जोड़ दो बराबर चार
...Things that we can control

दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है
सोच समझ वालों को थोडी नादानी दे मौला
...Things that we do not have control on , but always try the same

रंगी को नारंगी कहे , बने दूध को खोया . चलती को गाड़ी कहे , देख कबीरा रोया



दुनिया
के रंग दुनिया के ढंग ,

जिन्होंने नारंगी जैसे रंगे हुए फल को "ना रंगी " नाम दे दिया है ,
दूध से जो बनता है उसे "खोया " कह दिया ,
जो चलते हैं उने कहते हैं "गाड़ी" यानी स्थिर

यही ढर्रा है ... इन्ही के साथ जीना हैं ... ऐसे ही रहना है
क्यूंकि आपको आजीवन अकेले रहना है ना ही आप अकेले कोई परिवर्तन ला सकते हैं

आस पराई जो तके जीवित ही मर जाए



पहले
अमुक व्यक्ति अपना अमुक काम कर ले उसके बाद जनाब उनका काम देख कर अपना काम पूरा करेंगे ...

... और उनके पास अपने इस बात को सत्य सिद्ध करने के लिए कई बातें रहती हैं ... जैसे ... " भई ! देख दुनिया में सौ में से चार ही लोग रहते हैं जो अपना काम स्वयं करते हैं अपनी एक पद्धति को अपना कर , और बाकी सब उनके क़दमोंपर ही चलते हैं "

... देखा अपनी अक्षमता को कितने अच्छे शब्दों में ढाल दिया ...

पर अगर देखा जाए तो सच भी है ... ऐसा नहीं होता है कभी की जीवन जीने के सारे गुर या काम करने के सारे गुरआपको पता ही हों या हमेशा जिम्मेदारी से रहित हों ... आप कहीं कहीं किसी किसी को देख कर कहीं कहींकुछ कुछ पढ़ कर ही सीखते हैं बात यहाँ तक हो तो ठीक है ...

... पर हद तो तब हो जाती है जब you are driven by "Control+C" and "Control+V".... और धीरे धीरे आपको ख़ुद ही लगने लगता है की ..."आए थे हरी भजन को , ओटन लगे कपास "

... ये भी तब जब अगर गलती से सद्बुद्धि जाए

भेड़ जहाँ भी जाएगी मुंडेगी



ये
लोकोक्ति उनके लिए है जो सोचते हैं की अगर वो अच्छे हैं और वो अच्छा व्यवहार दूसरों के साथ करते हैं तो उनके साथ भी अच्छा ही व्यवहार ही होगा ... और जब तक उनको इस झूट के सच होने का पता चलता है ... बहुत बार देर हो जाती है

... आप शाकाहारी हैं तो इसका मतलब ये नहीं की सामने खड़ा शेर भी घास ही खाता होगा

लोकोक्तियाँ



इन
लोकोक्तियों को लिखा किसने , किसके मुहँ से पहली बार निकली ये किसी को पता नहीं

पर इन एक दो वाक्यों में जीवन का सार गर्भित रहता है

बताना ज़रूर

साफ़ सुथरे कपडों में
नहाये धुले तुम
दुखी अपने मन को , हंसा जो पाओ तो

इतने सारे लोगों में चीखते तो हो
पर अपनी मन की बात , किसी को बता जो पाओ तो

हर एक सुबह सबके सामने हँसते तो हो
झूटी अपनी उस हँसी को छोड़
सच्ची मुस्कान चेहरे पे अपने ला जो पाओ तो

अपना दे के मोल
किसी और को खुशी दे जो पाओ तो
खुशी उसकी देखकर
आंखों से तुम्हारी
दो बूँद खुशी के
कभी छलक के आएं तो

कभी किसी के लिए बिना ही मतलब के
सहाय हो जो पाओ तो

किसी अपनी बात से कभी
नवजात को किसी
हंसा जो पाओ तो

गर्म धूप से
थक के होके चूर , भीग कर पसीने में
घनी पेड़ की छावं पा जो पाओ तो
प्यासे अपने गले को, सुराही के पानी की ठंडक समझा जो पाओ तो
ठंडी उस पेड़ की हवा में ज़मीन पर वहीँ सो जो पाओ तो

रास्ते में खड़े
मैले कुचेले भीखारिओं से
डर जो पाओ तो

ग़लत देख सुन के सही जो बोल पाओ तो
चुप रह के देखने और सुनने के सिवा
कोई और इलाज इस बीमारी का जो ढूंढ पाओ तो

लाख कोशिश कर बीते हुए अपने दिनों को
ढूंढ कर ला जो पाओ तो
जो पल बीते उनको
यादों में सहेजने के सिवा कुछ और कर जो पाओ तो

चाहिए क्या तुम्हे अपने जीवन से
बस इतनी सी बात पता कर जो पाओ तो

अपनी ऐसी इसी बीतते हुए जीवन का कभी
भविष्य जो देख पाओ तो
देख के निश्चिंत हो जो पाओ तो
बताना
ज़रूर